ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਵਿਖੇ ਡਰਾਈਵਰ ਯੂਨੀਅਨ ਨੇ ਭਗਵਾਨ ਵਾਲਮੀਕ ਜੀ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਲੰਗਰ ਲਾਇਆ ।
कुछ न था मेरे पास खोने को
तुम मिले हो तो डर गया हूँ मैं
नोमान शौक़
तुझ से बिछड़ूँ तो तिरी ज़ात का हिस्सा हà¥...
मैं एक ख़ाना-ब-दोश हूँ जिस का घर है दुनिया
सो अपने काँधे पे ले के ये घर भटक रहा हूँ
पल्लव मिश्रा
इश्क़ में à...
कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था
बिछड़ा तो ख़याल उस का हक़ था
किश्वर नाहीद
थके-हारे परà¤...
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है
सर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है
*सलीम कौसर*
उन्हें ठहरे समुंदर ने डुबोया
जिन्हें तूफ़ाँ का अंदाज़ा बहुत था
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
जाने क्यूँ इक ख़à...
रोज़ मिलता है आपसा कोई,
वो मगर आपसा नहीं होता.
एहतराम इस्लाम
बहुत अजीब है ये क़ुर्बतों की दूरी भी,
व...
रोज़ मिलता है आपसा कोई,
वो मगर आपसा नहीं होता.
एहतराम इस्लाम
बहुत अजीब है ये क़ुर्à...
जानता उस को हूँ दवा की तरह
चाहता उस को हूँ शिफ़ा की तरह
हक़ीर
है जिस्म सख़्त मगर दिल बहुत ही नाज़ुक है
मोहब्बत में कठिन रस्ते बहुत आसान लगते थे
पहाड़ों पर सुहुलत से चढ़ा करते थे हम दोनों।
हसन अब्बासी
तेरे जाते ही ये हुआ महसूस
आइने मुस्कुराना भूल गए
अंजुम लुधियानवी
हम बहुत पछताए आ...
तुझी पर कुछ ऐ बुत नहीं मुनहसिर
जिसे हम ने पूजा ख़ुदा कर दिया
मीर तक़ी मीर
मुदà¥...
मेरी पोशाक तो पहचान नहीं है मेरी
दिल में भी झाँक मिरी ज़ाहिरी हालत पे न जा
ऐतबार साजिद
...
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा
अमà...
यूँ बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादें
जैसे बरसात की रिम-झिम में समाँ होता है
क़तील शिफ़ाई
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखà¥...
इश्क़ वजह-ए-ज़िंदगी भी दुश्मन-ए-जानी भी है
ये नदी पायाब भी है और तूफ़ानी भी है
जवाँ संदेलवी
...सर पर ये जो छत का साया होता है
दीवारों ने बोझ उठाया होता है
फख़्र अब्बास
ख़्वाब गलि...
उम्र बड़ी होती है रोने वालों की
गीली लकड़ी जलते-जलते जलती है
राजेश रेड्डी
ज़िंदगà...