Thu, 29 Oct 2026
G2M देता है आप कीं क़लम आप के हाथ । G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के। G2M देता है आप कीं क़लम आप के हाथ । G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के।
Post Details

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे तू बहुत देर से मिला है मुझे

उम्र बड़ी होती है रोने वालों की

गीली लकड़ी जलते-जलते जलती है

राजेश रेड्डी

 

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे

तू बहुत देर से मिला है मुझे

अहमद फ़राज़

 

यहाँ मेहनत की रोटी भी बड़ी मुश्किल से पचती है

वो सारा मुल्क खा जाएँ तो बदहज़मी नहीं होती...

शकील जमाली

 

सफ़र से आए तो फिर इक सफ़र नसीब हुआ

कि 'उम्र-भर के लिए किस को घर नसीब हुआ

सलीम सरफ़राज़

 

फ़क़त ज़बाँ से ना कह मुझ को ज़िंदगी अपनी

मैं ज़िंदगी हूँ तू अच्छी तरह गुज़ार मुझे...

आसिफ़ रशीद असजद

 

मुद्दत हुई है बिछड़े हुए अपने-आप से

देखा जो आज तुम को तो हम याद आ गए

साग़र ख़य्यामी

 

ज़िंदा रहना है तो हालात से डरना कैसा 

जंग लाज़िम हो तो लश्कर नहीं देखे जाते  

मेराज फ़ैज़ाबादी

 

 बजाकर घंटियाँ अक्सर घरों की भागता हूँ 

मेरे किरदार में अब भी मेरा बचपन बहुत है 

अशोक 'नूर'

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 254616

Share this Post