Fri, 30 Oct 2026
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उस ख़ुदा की तलाश है 'अंजुम' जो ख़ुदा हो के आदमी सा लगे

यूँ बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादें

जैसे बरसात की रिम-झिम में समाँ होता है

क़तील शिफ़ाई

 

इश्क़ और अक़्ल में हुई है शर्त

जीत और हार का तमाशा है

सिराज औरंगाबादी

 

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ पे मौक़ूफ़ नहीं लुत्फ़-ए-सुख़न

आँख ख़ामोश अगर है तो ज़बाँ कुछ भी नहीं

मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी

 

आसाँ नहीं विसाल तो दुश्वार भी नहीं 

मुश्किल में हूँ ये मुश्किल-ए-आसाँ लिए हुए

अमजद नज़मी

 

उदासी शाम तन्हाई कसक यादों की बेचैनी

मुझे सब सौंप कर सूरज उतर जाता है पानी में

अलीना इतरत

 

चाँद की नब्ज़ देखना उठ कर

रात की साँस गर्म लगती है

गुलज़ार

 

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता

बशीर बद्र

 

उस ख़ुदा की तलाश है 'अंजुम' 

जो ख़ुदा हो के आदमी सा लगे

अंजुम सलीमी

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