ਜਿਸ ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਸ਼ਹਿਰ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਸੁਥਰਾ ਰੱਖਣ ਦੀ ਉਸਦੇ ਮੇਨ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬਾਥਰੂਮਾਂ ਦਾ ਬੁਰਾ ਹਾਲ ਹੈ ।
क्यों?
मेरे हिस्से नहीं आए वो ख्वाब,
जो हर अंधेरी रात में रोशनी बन जाते,
जो ठहरी हुई हवा में भी गुनगुनाते ,
और उम्मीद की किरण दे जाते ।
क्यों?
वो राहें नहीं मिलीं,
जो सफ़र के लिए नहीं, मंज़िल के लिए जानी जाती ,
जो ठोकर खाने पर मुस्कुराना सिखाती ,
और रुकने पर हिम्मत का हाथ बढ़ाती।
क्यों?
शायद मैंने ख्वाबों से खुद को दूर कर लिया,
और उन्हें जीने की बजाय बस उन्हें सोचने में रह गया।
"श्रुता"






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