Friday, 30 Jan 2026

ख़्वाबों का हिस्सा

 

क्यों?  

मेरे हिस्से नहीं आए वो ख्वाब,  

जो हर अंधेरी रात में रोशनी बन जाते,  

जो ठहरी हुई हवा में भी गुनगुनाते ,  

और उम्मीद की किरण दे जाते ।  

 

क्यों?  

वो राहें नहीं मिलीं,  

जो सफ़र के लिए नहीं, मंज़िल के लिए जानी जाती ,  

जो ठोकर खाने पर मुस्कुराना सिखाती ,  

और रुकने पर हिम्मत का हाथ बढ़ाती।  

 

क्यों?  

 

शायद मैंने ख्वाबों से खुद को दूर कर लिया,  

और उन्हें जीने की बजाय बस उन्हें सोचने में रह गया।  

 

 

 

"श्रुता"


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