Sun, 03 May 2026
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कुछ न था मेरे पास खोने को

कुछ न था मेरे पास खोने को

तुम मिले हो तो डर गया हूँ मैं

नोमान शौक़

 

तुझ से बिछड़ूँ तो तिरी ज़ात का हिस्सा हो जाऊँ

जिस से मरता हूँ उसी ज़हर से अच्छा हो जाऊँ

अहमद कमाल परवाज़ी

 

तुझी से गुफ़्तुगू हर दम तिरी ही जुस्तुजू हर दम

मिरी आसानियाँ तुझ से मिरी मुश्किल है तू ही तू

अमीता परसुराम मीता

 

हम से यहाँ तो कुछ भी समेटा न जा सका 

हम से हर एक चीज़ बिखरती चली गई।

अमीर इमाम

 

कोई भी सुर में नहीं है 'मुनीर' क्या कीजे

ये ज़िंदगी का तराना रियाज़ माँगता है

बद्र मुनीर

 

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया

घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

राहत इंदौरी

 

उलझने लाख सही राह में आयेंगी मगर

 तेरे किरदार पे हावी तेरा बचपन ही रहे ।।

प्रेम भंडारी

 

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे 

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों 

बशीर बद्र

 

आदमी की तलाश में है ख़ुदा

आदमी को ख़ुदा नहीं मिलता

रईस अमरोहवी


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