Friday, 30 Jan 2026

क़रार दिल को सदा जिस के नाम से आया वो आया भी तो किसी और काम से आया

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

 

बड़े सुकून से अफ़्सुर्दगी में रहता हूँ 

मैं अपने सामने वाली गली में रहता हूँ 

आबिद मलिक

 

क़रार दिल को सदा जिस के नाम से आया 

वो आया भी तो किसी और काम से आया 

जमाल एहसानी

 

रुका महफ़िल में इतनी देर तक मैं

उजालों का बुढ़ापा देख आया

शारिक़ कैफ़ी

 

एक पल के रुकने से दूर हो गई मंज़िल

सिर्फ़ हम नहीं चलते रास्ते भी चलते हैं

शाहिद सिद्दीक़ी

 

मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिए

फूल बंजर में उगाना सीखिए

नीरज गोस्वामी

 

तुम जो चाहो तो रुक भी सकता है

वर्ना किस से रुका है आधा दिन

अम्बरीन सलाहुद्दीन

 

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं

किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं

ख़ुमार बाराबंकवी


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