ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਦੀ ਵਰਕਸ਼ਾਪ ਵਿਖੇ ਡਰਾਈਵਰ ਯੂਨੀਅਨ ਨੇ ਭਗਵਾਨ ਵਾਲਮੀਕ ਜੀ ਨੂੰ ਸਮਰਪਿਤ ਲੰਗਰ ਲਾਇਆ ।
उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना
अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं
तुम ज...
कुछ यादें ऐसी होती हैं
जैसे पुराने किताब में
रखा हुआ गुलाब।
सूखा हुआ सही,
पर अब भी महकता हुआ।
तेरी हँस...
रात भीगी नहीं थी …
बस किसी ने
आँसू छत पर टांग दिए थे।
बूंदें …
जैसे अधूरी दुआओं की आवाज़ हों ..
हलà¥...
यादों की महक...
बड़ी अजीब होती है।
दिखती नहीं...
पर महसूस होती है।
जैसे बारिश के बाद,
मिट्टी की सोंधी खà...
चौखट पे जो धूप बिखरा करती थी,
अब खिड़की से छनकर आती है।
गलियों में जो हंसी बिà¤...
सुबह की धूप जैसी हो तुम,
जो खिड़की से झांककर कहती है
देखो, दुनिया कितनी खूबसूरत है,
तेरी हंसी जैसे पहली बà...
मैं और मेरी तन्हाई,
अब शिकवे नहीं करते एक-दूसरे से,
पहले जो आँसुओं में घुलती थी,
अब खामोशियों में मुस्कुरà¤...
सूरज हर सुबह निकलता है,
पूरी दुनिया को जगाता है,
पर किसी की आँखों में नहीं ठहरता।
चाँद हर रात आता है,
कभी प...