Fri, 31 Jul 2026
G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के। G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के।

मैं और मेरी तन्हाई

 


मैं और मेरी तन्हाई,
अब शिकवे नहीं करते एक-दूसरे से,
पहले जो आँसुओं में घुलती थी,
अब खामोशियों में मुस्कुराने लगी है।

कभी कॉफी के धुएँ में
तेरी शक्ल उभर आती थी,
अब वही धुआँ
बस यादों के बादलों सा बह जाता है।

दीवारों पर टिके साए
जो पहले डराते थे,
अब हर शाम
मेरे साथ बैठकर बातें करते हैं।

तन्हाई ने सिखाया है कि ,
हर खालीपन अधूरा नहीं होता,
कुछ खालीपन ज़रूरी होते हैं… खुद को पूरा करने के लिए।

अब तन्हाई बोझ नहीं लगती,
वो मेरी सबसे अच्छी हमसफ़र बन गई है,
जो कभी रुलाती थी,
अब हर रोज़ खुद को पाने की वजह बन गई है।

 

*कंचन "श्रुता"*

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 188624