Sun, 01 Nov 2026
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यादों की महक

 

यादों की महक... 
बड़ी अजीब होती है।
दिखती नहीं... 
पर महसूस होती है।
जैसे बारिश के बाद,
मिट्टी की सोंधी खुशबू।
आँखों को नहीं ...
पर दिल को कुछ नम कर जाती है।

यादों की महक जैसे ...
कभी किसी किताब में,
रखा हुआ कोई फूल।
सूख गया है... रंग उड़ गया है...
पर खुशबू...
वही है...
उस दिन की... 

यादों की महक...
कभी किसी गली के मोड़ पर मिलती है , 
जहाँ कभी खेला करते थे।
वो धूल...
वो दीवारों की सीलन...
सब कुछ वही है...
बस हम बड़े हो गए हैं।

यादों की महक...
एक एहसास है...
जो ज़िंदा रखता है... उन लम्हों को...
जो गुज़र गए।

एक पुल है...
अतीत से... आज तक।
एक खामोश सी... कहानी है...
जो हर साँस के साथ...
बुनती रहती है।

बस... महक...
महसूस होती है...
और दिल...
थोड़ा... भीग जाता है।


*कंचन "श्रुता"*

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