Fri, 30 Oct 2026
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महकती यादें

 

कुछ यादें ऐसी होती हैं
जैसे पुराने किताब में
रखा हुआ गुलाब।
सूखा हुआ सही,
पर अब भी महकता हुआ।

तेरी हँसी,
तेरी आँखों की वो चमक,
तेरे बोलने का ढंग 
सब कहीं न कहीं
मेरे आस-पास रहता है।

जब हवा होले से मुझे छू के गुजरती है,
तो लगता है जैसे तेरी आवाज़
फिर से कानों में उतर रही हो।
जब बरसात आती है,
तो तेरे साथ बिताए हुए पल
भीगकर ताज़ा हो उठते हैं।

ये महकती यादें,
दिल को चुभती भी हैं,
सुकून भी देती हैं।
जैसे तेरी गैरमौजूदगी में भी
तेरा होना,
मेरे भीतर सांस लेता हो।


*कंचन "श्रुता"*

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