Thu, 30 Jul 2026

अहमद फ़राज़

उस ने कहा
सुन
अहद निभाने की ख़ातिर मत आना
अहद निभाने वाले अक्सर
मजबूरी या महजूरी की थकन से लौटा करते हैं
तुम जाओ
और दरिया दरिया प्यास बुझाओ
जिन आँखों में डूबो
जिस दिल में उतरो
मेरी तलब आवाज़ न देगी
लेकिन जब मेरी चाहत
और मिरी ख़्वाहिश की लौ
इतनी तेज़ और इतनी
ऊँची हो जाए
जब दिल रो दे
तब लौट आना

 

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