Friday, 30 Jan 2026

अगर तुम साथ हो

 

सुबह की धूप जैसी हो तुम,
जो खिड़की से झांककर कहती है
देखो, दुनिया कितनी खूबसूरत है,


तेरी हंसी जैसे पहली बारिश,  
जो सूखी ज़मीन को फिर से जिंदा कर दे,  
तेरी आहट जैसे किसी बंद दरवाज़े पर,
बरसों बाद कोई दस्तक दे दे ।

अगर तुम साथ हो,  
तो अधूरे ख़्वाब पूरे होने लगेंगे,  
हर दर्द किसी नए सुकून में ढल जाएगा,  
और अकेलेपन का ये वीरान कमरा,  
फिर से तेरी बातों की रौनक से चहक उठेगा।  

तेरे बिना भी जिया जा सकता है,  
पर हर चीज़ अधूरी लगती है…  
जैसे चाय में मिठास कम हो,  
जैसे बारिश हो, पर मिट्टी की खुशबू नहीं ।  

अगर तुम साथ हो,  
तो हर लम्हा एक नई कहानी होगी,  
हर शाम, किसी नई मुस्कान का मौसम,  
और ज़िन्दगी…  
एक मधुर संगीत बन जाएगी।

 

*कंचन "श्रुता"*


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