ना तुम मेरे
ना मैं तुम्हारा
ना कभी मिले
ना बिछड़े
फिर भी
तुम
धड़कन में हो
और
धड़कन तुम्हारे बिना मुकम्मल नहीं
मोहब्बत कहूं
तो लफ़्ज़ छोटे पड़ जाएं
इन्कार करूं
तो
दिल मानता नहीं
बस
इतना जान लो
तुम ज़रूरत नहीं
फिर भी ज़रूरी हो ।
*श्रुता*
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