Fri, 12 Jun 2026

बेनाम तलब

 

ना तुम मेरे  
ना मैं तुम्हारा  

ना कभी मिले  
ना बिछड़े  

फिर भी  

तुम 
धड़कन में हो  

और 

धड़कन तुम्हारे बिना मुकम्मल नहीं  

मोहब्बत कहूं 
तो लफ़्ज़ छोटे पड़ जाएं 
 
इन्कार करूं
 तो 
दिल मानता नहीं  

बस 
इतना जान लो  
तुम ज़रूरत नहीं  
फिर भी ज़रूरी हो  ।

*श्रुता*


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