Fri, 01 May 2026
G2M देता है आप की कलम आपके हाथ Journalists are invited to Join us on Gateway2media.com G2M देता है आप की कलम आपके हाथ Journalists are invited to Join us on Gateway2media.com

पलाश

 

धूप ने मुझे ख़त लिखा था ,  

जलकर भी लाल रहने का राज़ पूछने।  

हवा ने सरगोशियों में कहा,  

तेरी टहनियाँ सूखी हैं, फिर भी रंग कैसे ज़िंदा हैं? 

 

मैं मुस्कुराया …  

क्योंकि मुझे मालूम था—  

रंग शाखों पर नहीं, रगों में बहते हैं।  

कुछ ज़ख़्मों की आँच से जलते नहीं,  

बल्कि और निखर आते हैं।  

 

बरसात जब भी आई ,  

मैंने उससे शिकायत नहीं की।  

बस अपनी जड़ों तक उन्हें  

ख़ामोशी से उतार लिया।  

 

अब देखो,  

फिर से खिल उठा हूँ …  

जैसे किसी ने  

आसमान पर लाल मौसम टांक दिया हो।

 

*कंचन "श्रुता"*


184

Share News

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 155100