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चंडीगढ़ में मोबाइल पर रील्स देखने से रोकना एक 8 साल के बच्चे को इतना नागवार गुजरा कि वह बिना बताए घर से निकल गया। इसके बाद बच्चा अकेले ट्रेन में बैठकर करीब 638 किलोमीटर का सफर तय करते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंच गया। बच्चे के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार और पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
ट्रेन के स्लीपर कोच में अकेला मिला बच्चा
जानकारी के अनुसार, बच्चे को एक एक्सप्रेस ट्रेन के स्लीपर कोच में टीटीई ने अकेले सफर करते देखा। पूछताछ के दौरान जब बच्चे के साथ कोई परिजन नहीं मिला तो टीटीई ने इसकी सूचना आरपीएफ को दी। इसके बाद आरपीएफ अधिकारियों ने ग्वालियर में बच्चे को ट्रेन से उतारा और उससे उसके घर के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की।
मोबाइल नंबर से मां तक पहुंची आरपीएफ
आरपीएफ अधिकारियों ने जब बच्चे से घर का पता पूछा तो उसने अपना मोबाइल नंबर बताया। अधिकारियों ने उस नंबर पर संपर्क किया और बच्चे की मां से बात की। मां ने बताया कि बच्चा 11 सितंबर की दोपहर से घर से गायब था। परिवार के लोग उसकी तलाश कर रहे थे और चंडीगढ़ में बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।
सुरक्षित मिला बेटा, परिवार को दी जानकारी
आरपीएफ अधिकारियों ने बच्चे की मां को बताया कि उनका बेटा ग्वालियर पहुंच गया है और सुरक्षित है। अधिकारियों ने परिजनों से ग्वालियर आकर बच्चे को ले जाने के लिए कहा। बच्चे के सुरक्षित मिलने की सूचना के बाद परिवार को बड़ी राहत मिली।
माता-पिता के लिए जरूरी सीख
यह घटना बच्चों की मोबाइल और इंटरनेट की आदतों के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों को मोबाइल इस्तेमाल करने से रोकते समय माता-पिता को उनके साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नाराजगी या जिद में बच्चा घर से बाहर न निकल जाए। वहीं, बच्चों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ जाने से बचने और जरूरत पड़ने पर पुलिस या रेलवे अधिकारियों से मदद लेने के बारे में भी जागरूक करना जरूरी है।





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