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जालंधर: नगर निगम यूनियन नेताओं और कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जालंधर शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से कूड़े की लिफ्टिंग नहीं होने के कारण शहर के कई हिस्सों में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है और गंदगी के कारण बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
सरकारी और प्राइवेट दोनों स्तर पर काम ठप
सरकार समर्थक चंदन गरेवाल गुट और बंटू सबरवाल गुट से जुड़े यूनियन नेता और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण सरकारी ड्राइवर कूड़ा उठाने के लिए वाहन नहीं चला रहे हैं। वहीं, प्राइवेट ठेकेदारों को भी कूड़े की लिफ्टिंग का काम करने से रोका जा रहा है। ऐसे में शहर में रोजाना निकलने वाला कूड़ा जगह-जगह जमा होता जा रहा है।
ओल्ड जीटी रोड पर बीच सड़क लगाए कूड़े के ढेर
शनिवार को निगम कर्मचारियों ने पीएनबी चौक से भगवान वाल्मीकि चौक तक ओल्ड जीटी रोड के बीचों-बीच कूड़े के ढेर लगा दिए। इससे सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क के बीच जमा कचरे के कारण पूरे इलाके में गंदगी का माहौल बन गया है।
एक तरफ मेयर वनीत धीर शहर की ब्यूटीफिकेशन को लेकर विभिन्न विकास कार्य करवा रहे हैं, वहीं सफाई व्यवस्था के बिगड़ने से निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्लाजा चौक डंप भी दोबारा शुरू
हड़ताल के चलते प्लाजा चौक डंप भी दोबारा सक्रिय हो गया है। यहां भी लगातार कूड़े के ढेर बढ़ रहे हैं। शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण स्थानीय लोगों में रोष है और सरकार व नगर निगम प्रशासन को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
607 करोड़ के प्रोजेक्ट और पक्की भर्ती पर अड़े कर्मचारी
यूनियन नेताओं की प्रमुख मांगों में 607 करोड़ रुपये के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को निजी कंपनी को सौंपने का विरोध और 1,196 सफाई कर्मचारियों की पक्की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करना शामिल है। हालांकि, दोनों मांगों को तत्काल स्वीकार करना निगम प्रशासन के लिए आसान नजर नहीं आ रहा।
मंगलवार की हाउस बैठक पर टिकी नजरें
मंगलवार को पार्षद हाउस की बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा होनी है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट को निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी है। वहीं, 1,196 सफाई कर्मचारियों की पक्की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में भी कई प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि यूनियन की हड़ताल कितने समय तक जारी रहती है और आने वाले दिनों में शहर में कूड़े की समस्या कितनी गंभीर होती है। हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था के साथ-साथ सरकार और नगर निगम प्रशासन की छवि पर भी पड़ सकता है।





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