ਜ਼ਿਲਾ ਕਾਂਗਰਸ ਜਲੰਧਰ ਅਤੇ ਦਿਹਾਤੀ ਨੇ ਨੀਟ ਦੇ ਪੇਪਰ ਲੀਕ ਕਾਰਨ ਮਾਰੇ ਗਏ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰਧਾਂਜਲੀ ਦਿੱਤੀ ।
जालंधर एपीजे कॉलेज के बाहर उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला, जब कॉलेज के बाहर छात्र और पीड़ित छात्रा के परिजन धरने पर बैठ गए। पूरा मामला छात्रा महक शर्मा की थर्ड ईयर की एडमिशन को लेकर है। परिजनों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन उनकी बेटी को एडमिशन देने से मना कर रहा है और इसी के विरोध में कॉलेज के गेट बंद कर दिए गए थे, जिसके बाद छात्रों ने मौके पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छेड़छाड़ का पुराना मामला और कॉलेज प्रबंधन पर आरोप
पीड़ित छात्रा महक शर्मा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह पिछले दो साल से इसी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। करीब दो महीने पहले परीक्षा (पेपर) के दौरान सचिन नाम के एक टीचर ने उसके साथ गलत हरकत और छेड़छाड़ की थी। छात्रा के अनुसार, जब उसने यह बात अपने परिजनों को बताई और परिजनों ने कॉलेज की सीनियर टीचर से शिकायत की, तो उनकी बात अनसुनी कर दी गई। हालांकि, बाद में प्रिंसिपल ने टीचर को कॉलेज से निकालने का आश्वासन देकर मामला शांत करने की अपील की थी। अब जब परिजन छात्रा का एडमिशन करवाने पहुंचे, तो कॉलेज प्रशासन ने हायर अथॉरिटी की मीटिंग का हवाला देकर एडमिशन देने से साफ इनकार कर दिया और परिजनों को घंटों इंतजार करवाया।
पीड़ित परिवार और छात्र संगठनों का कड़ा रुख
पीड़ित छात्रा की माता रितु ने बताया कि वे लोग लगातार दो दिन से कॉलेज के चक्कर काट रहे हैं और एडमिशन न देने की वजह पूछने पर सिर्फ टालमटोल किया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में उतरे खालसा कॉलेज के प्रधान लक्ष्य कपिला ने भी शिरकत की। उनका कहना था कि पेपर के दौरान जानबूझकर छात्रा की सीट बदली गई और उसके साथ गलत हरकत की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वे पीड़ित बच्ची के हक में आवाज उठा रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस उनका सहयोग करने के बजाय कॉलेज के बाहर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास कर रही है। प्रधान ने प्रशासन से तत्काल इंसाफ की गुहार लगाई है।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच
घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महक शर्मा नामक छात्रा को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है। प्रिंसिपल की तरफ से फोन पर जानकारी दी गई थी कि हायर अथॉरिटी की मीटिंग होने के कारण फिलहाल एडमिशन पर रोक लगी हुई है। पुलिस के मुताबिक, अभी तक पीड़ित परिजनों की ओर से लिखित शिकायत थाने में नहीं दी गई है, लेकिन जैसे ही कोई औपचारिक शिकायत मिलती है, पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगी।





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