Sun, 03 May 2026
G2M देता है आप की कलम आपके हाथ Journalists are invited to Join us on Gateway2media.com G2M देता है आप की कलम आपके हाथ Journalists are invited to Join us on Gateway2media.com

गुण गुणियों में रहकर ही गुण होते है ,निर्गुण को प्राप्त करके वह दोषयुक्त हो जाते है।

नदियों के जल तभी तक स्वादिष्ट (पीने योग्य) होते है। जब तक बहते रहते है।

                गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति,
                ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः ।
                आस्वाद्यतोयाः प्रवहन्ति नद्यः ,
                समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेया  

गुण गुणियों में रहकर ही गुण होते है ,निर्गुण को प्राप्त करके वह दोषयुक्त हो जाते है। नदियों के जल तभी तक स्वादिष्ट (पीने योग्य) होते है। जब तक बहते रहते है,समुद्र को प्राप्त करके वे अपेय (न पीने योग्य) हो जाते है।
————————————————
गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणो बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बल:  पिको वसन्तस्य गुणं न वायस: करी च सिंहस्य बलं न मूषक: ॥ 

गुणी पुरुष ही दूसरे के गुण पहचानता है, गुणहीन पुरुष नही। बलवान पुरुष ही दूसरे का बल जानता है, बलहीन नही। वसन्त ऋतु आए तो उसे कोयल पहचानती है, कौआ नही। शेर के बल को हाथी पहचानता है, चूहा नही।


198

Share News

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 156046