Tue, 04 Aug 2026
Post Details

'धार्मिक भावनाओं पर हमला'... श्री देवी तालाब मंदिर की घटना पर संत समाज का बड़ा एक्शन

जालंधर के प्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में दो दिन पहले हुई पत्थरबाजी की घटना को लेकर मामला लगातार गरमाता जा रहा है। मंगलवार को संत समाज और श्री देवी तालाब मंदिर प्रबंधन कमेटी के प्रतिनिधि पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत सौंपी। साथ ही मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की गई।

संत समाज ने घटना को बताया बेहद निंदनीय
भारत साधु समाज की ओर से महंत बंसीदास ने कहा कि सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे पवित्र धार्मिक स्थल में पत्थरबाजी, हंगामा और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

देश-विदेश से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
मंदिर प्रबंधन के अनुसार श्री देवी तालाब मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु माता श्री त्रिपुरमालिनी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा पंजाब की 450 से अधिक मंदिर समितियां भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस शक्तिपीठ से जुड़ी हुई हैं। ऐसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर हुई घटना को लेकर श्रद्धालुओं में चिंता का माहौल है।

श्रद्धालुओं में फैला भय, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
संत समाज का कहना है कि मंदिर परिसर में हुई पत्थरबाजी से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई। उनका कहना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आस्था और धार्मिक मर्यादा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने पुलिस से मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

पुलिस ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
पुलिस अधिकारियों ने संत समाज और मंदिर प्रबंधन को भरोसा दिलाया है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार घटना से जुड़े CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। अधिकारियों ने कहा कि दोषियों की पहचान होते ही उन्हें गिरफ्तार कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 191717