Mon, 05 Oct 2026
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विश्लेषण : AAP में कैंट सीट को लेकर कई दावेदार, किसे मिलेगी सीट

जालंधर कैंट विधानसभा सीट को लेकर आम आदमी पार्टी के भीतर सियासी हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन टिकट की संभावनाओं को लेकर कई चेहरे अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में कैंट की एक सीट और उसके लिए कई दावेदारों की मौजूदगी ने पार्टी के भीतर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

इस दौड़ में राजविंदर कौर थियाड़ा के साथ डिप्टी मेयर मलकीत सिंह सुभाना, पंजाब एग्रो बोर्ड के चेयरमैन मंगल सिंह बस्सी और हाल में पार्टी में शामिल हुए रणतेज सिंह पोवार जैसे नाम चर्चा में हैं। हालांकि, अभी तक आम आदमी पार्टी की ओर से 2027 के लिए किसी उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

थियाड़ा के पास हलका इंचार्ज की मौजूदा भूमिका
इन दावेदारियों के बीच राजविंदर कौर थियाड़ा की स्थिति इसलिए अलग दिखाई देती है क्योंकि वह लंबे समय से जालंधर कैंट की हलका इंचार्ज के तौर पर पार्टी की गतिविधियों का नेतृत्व कर रही हैं। मार्च 2025 में उनकी जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की चेयरपर्सन के रूप में नियुक्ति भी हुई थी और उस दौरान उनके पदभार संभालने के कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे थे।

2026 में भी उनकी कैंट हलके में सक्रियता बनी हुई है। हाल ही में जमशेर इलाके में AAP के डोर-टू-डोर अभियान की अगुवाई उन्होंने की, जिसमें सरकार की योजनाओं और कामों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन की ओर से उन्हें कैंट में लगातार सक्रिय जिम्मेदारी दी जा रही है।

दावेदारी का सबसे बड़ा आधार संगठन और जमीनी सक्रियता
किसी भी विधानसभा सीट पर टिकट की दावेदारी केवल पद या राजनीतिक पहचान से तय नहीं होती। संगठन में पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और लंबे समय तक क्षेत्र में मौजूदगी भी महत्वपूर्ण फैक्टर होते हैं। थियाड़ा के मामले में उनकी मौजूदा हलका इंचार्ज की भूमिका उन्हें यही संगठनात्मक आधार देती है। हाल के महीनों में भी वह कैंट क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रमों, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में दिखाई दी हैं। सितंबर 2026 में AAP के एक अभियान में उनके नेतृत्व में पार्टी ने क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियां तेज करने की कोशिश की।

चंडीगढ़ में बैठे भारी-भरकम नेता भी सीट की दावेदारी में
कैंट की सियासत में एक दिलचस्प चर्चा यह भी है कि चंडीगढ़ में बैठे कैंट हलके के एक भारी-भरकम नेता, जो फिलहाल चेयरमैन के पद पर तैनात हैं, ने अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल करते हुए राजविंदर कौर थियाड़ा को कैंट हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी से हटाने की कोशिश की थी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसके पीछे मकसद कैंट सीट पर अपनी दावेदारी को मजबूत करना था। हालांकि, पार्टी हाईकमान ने थियाड़ा को हटाने का फैसला नहीं लिया और वह अब भी कैंट हलके की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि हलका इंचार्ज के पद से हटाने की कथित कोशिश के बावजूद उक्त नेता की कैंट सीट को लेकर दावेदारी खत्म नहीं हुई है। वह अभी भी खुद को इस सीट के प्रमुख दावेदारों में गिनवा रहे हैं। ऐसे में कैंट की टिकट को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकती है।

बाकी दावेदार भी पीछे नहीं
दूसरी तरफ डिप्टी मेयर मलकीत सिंह सुभाना के पास नगर निगम की राजनीति और स्थानीय निकाय स्तर का अनुभव है। पार्टी के भीतर उनकी पहचान और शहर की राजनीति में सक्रियता उन्हें दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। पंजाब एग्रो बोर्ड के चेयरमैन मंगल सिंह बस्सी भी संगठन और सरकार से जुड़े पद के कारण राजनीतिक रूप से सक्रिय चेहरों में शामिल हैं। उनके लिए चुनौती यह होगी कि राज्य स्तर की जिम्मेदारी को कैंट विधानसभा क्षेत्र में मजबूत व्यक्तिगत और संगठनात्मक नेटवर्क में किस तरह बदला जाए।

रणतेज सिंह पोवार ने भी सीट के लिए दावेदारी ठोकी
रणतेज सिंह पोवार की दावेदारी का अलग राजनीतिक पहलू है। पार्टी में हालिया प्रवेश के कारण उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि वह कितनी तेजी से कैंट क्षेत्र के संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी जगह बना पाते हैं। हालांकि, नए चेहरे होने के बावजूद राजनीतिक दलों में ऐसे नेताओं को भी अवसर मिलते रहे हैं, जिनकी स्थानीय या सामाजिक पृष्ठभूमि पार्टी के लिए उपयोगी मानी जाती है।

कैंट में टिकट का फैसला कई समीकरणों पर निर्भर
जालंधर कैंट की राजनीति में 2027 का चुनाव केवल पार्टी के अंदर की टिकट रेस तक सीमित नहीं रहने वाला। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के परगट सिंह ने 40,816 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि AAP के सुरिंदर सिंह सोढ़ी को 35,008 वोट मिले थे। यानी पिछला मुकाबला भी करीबी रहा था और इस बार उम्मीदवार का चयन पार्टी के चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

इसी वजह से AAP के लिए कैंट में उम्मीदवार चुनते समय संगठनात्मक पकड़, स्थानीय स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और चुनावी रणनीति जैसे कई पहलुओं को देखना होगा।

असली मुकाबला अब पार्टी के अंदर
फिलहाल कैंट सीट पर किसी एक नाम को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि कई दावेदारों की मौजूदगी ने AAP के भीतर टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। राजविंदर कौर थियाड़ा के पास लंबे समय से हलका इंचार्ज रहने और लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने का आधार है, जबकि दूसरे दावेदार अपने-अपने राजनीतिक पद, संगठनात्मक संपर्क और स्थानीय प्रभाव के जरिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है। ऐसे में आने वाले महीनों में कैंट की सियासत में सबसे ज्यादा नजर इसी बात पर रहेगी कि कौन सा चेहरा संगठन के भीतर अपनी दावेदारी को सबसे मजबूती से स्थापित कर पाता है।

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