Sun, 20 Sep 2026
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पूर्व पीएम के बेटे नाम पर करोड़ों की ठगी, फेक प्रोफाइल बनाकर फंसाया जाल में

पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल की कंपनी को साइबर ठगों ने करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया। ठगों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी वॉट्सएप प्रोफाइल बनाई और कंपनी के एक कर्मचारी को झांसे में लेकर ₹7.80 करोड़ ट्रांसफर करवा लिए। हालांकि मामले की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने कार्रवाई करते हुए करीब ₹4 करोड़ की राशि फ्रीज करवा दी, जिससे ठग पूरी रकम निकालने में सफल नहीं हो सके।

फर्जी प्रोफाइल बनाकर वित्तीय टीम को बनाया निशाना
जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने नरेश गुजराल की तस्वीर को डिस्प्ले पिक्चर बनाकर एक फर्जी वॉट्सएप अकाउंट तैयार किया। इसके बाद कंपनी की वित्तीय टीम से जुड़े एक भरोसेमंद कर्मचारी को संदेश भेजा गया। मैसेज में कर्मचारी को रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के माध्यम से एक बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया। कर्मचारी ने संदेश को वास्तविक समझते हुए बताए गए खाते में धनराशि भेज दी। बाद में यह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

बेटी को जानकारी मिलने पर खुला ठगी का राज
यह मामला 16 जून 2026 को सामने आया। रकम ट्रांसफर होने के बाद कर्मचारी ने इसकी जानकारी नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल को दी। उन्हें इस लेन-देन पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपने पिता से संपर्क किया। नरेश गुजराल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को भी पैसे ट्रांसफर करने का कोई निर्देश नहीं दिया था और उन्हें इस लेन-देन की कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद परिवार और कंपनी के अधिकारियों को एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

बैंक से पुष्टि के बाद भी हो गई ठगी
नरेश गुजराल के अनुसार, लेन-देन से पहले बैंक ने कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) से फोन पर पुष्टि भी की थी। हालांकि सीएफओ को लगा कि भुगतान संबंधी निर्देश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से दिए गए हैं, इसलिए उन्होंने ट्रांजैक्शन को मंजूरी दे दी।
बाद में जब पूरे मामले की जांच हुई तो पता चला कि साइबर ठगों ने फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर कंपनी को निशाना बनाया था।

साइबर सेल ने शुरू की जांच
मामले की शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। एजेंसियां उन बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की पड़ताल कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई में करीब ₹4 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी गई है, जबकि बाकी रकम का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

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