जालंधर नगर निगम द्वारा शहर के सौंदर्यीकरण के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट अब विवादों के घेरे में हैं। ताजा मामला कूल रोड का है, जहाँ अर्बन एस्टेट फेज-1 और फेज-2 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर सौंदर्यीकरण का एक बड़ा ढांचा खड़ा कर दिया गया है। इस निर्माण के कारण सड़क का एक बड़ा हिस्सा बंद हो गया है, जिससे आवाजाही प्रभावित हो रही है। उल्लेखनीय है कि कूल रोड जमशेर की कॉलोनियों और गांवों को शहर से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
पहले चौड़ी की गई सड़क, अब डाली बाधा
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कुछ समय पहले इसी सड़क को सुचारू बनाने के लिए निगम ने बीच में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को किनारों पर शिफ्ट किया था। सड़क को चौड़ा और साफ करने के बाद अब अचानक सौंदर्यीकरण के नाम पर बीच रास्ते में ढांचा खड़ा करना समझ से परे बताया जा रहा है। रेलवे लाइन के साथ लगती इस महत्वपूर्ण सड़क के बंद होने से पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
बिना हाउस और पार्षदों की सलाह के बांटी जा रही साइट्स
इस मामले में नगर निगम की प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक स्थल या सड़क किनारे सौंदर्यीकरण के लिए प्राइवेट कंपनियों को जगह देने से पहले नगर निगम हाउस की बैठक में इस पर चर्चा की जानी चाहिए और प्रस्ताव पारित होना चाहिए। हालांकि, आरोप है कि निगम अधिकारियों ने बिना जनप्रतिनिधियों या पार्षदों की सलाह लिए ही प्राइवेट कंपनियों को मनमर्जी से साइट्स आवंटित कर दी हैं।
पूर्व पार्षद बलराज ठाकुर ने जताई कड़ी आपत्ति
पूर्व पार्षद बलराज ठाकुर ने इस मामले को लेकर नगर निगम प्रशासन को घेरा है। उन्होंने कहा कि इलाका पार्षद की सलाह लिए बिना प्राइवेट कंपनियों को ऐसी महत्वपूर्ण साइटें देना गलत परंपरा है। ठाकुर ने कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर गलत जगह ढांचे खड़े करने से ट्रैफिक में बड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन अवैध निर्माणों के कारण जनता को असुविधा हुई, तो इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर ही सौंदर्यीकरण के कार्यों को अमलीजामा पहनाए।

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