Sun, 20 Sep 2026
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कनाडा में पनाह लेना हुआ मुश्किल, 30 हजार लोगों पर डिपोर्टेशन की लटकी तलवार

कनाडा जिसे कभी अप्रवासियों और शरणार्थियों के लिए सबसे सुरक्षित स्वर्ग माना जाता था, अब अपनी नीतियों में कठोर बदलाव कर रहा है। सरकार ने बड़ी संख्या में उन लोगों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है जो अस्थायी रूप से वहां रह रहे हैं या जिन्होंने शरण (Asylum) की मांग की है।

इन नोटिसों के जरिए स्पष्ट संकेत दिया गया है कि संबंधित व्यक्ति अब देश में रहने के पात्र नहीं हैं और उन्हें अपने वतन वापसी की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ने की संभावना है जो राजनीतिक या सुरक्षा कारणों का हवाला देकर वहां टिके हुए थे।

IRCC की कार्रवाई और 30 हजार नोटिस
इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने करीब 30,000 शरणार्थी आवेदकों को “प्रोसीजरल फेयरनेस लेटर्स” (Procedural Fairness Letters) भेजे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन आवेदकों के दावे शरण के तय मानकों और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये सीधे तौर पर डिपोर्टेशन ऑर्डर नहीं हैं, लेकिन यह एक अंतिम चेतावनी की तरह है। आवेदकों को अपनी बात रखने और अतिरिक्त सबूत पेश करने के लिए बहुत कम समय दिया गया है। अगर वे अपनी पात्रता साबित नहीं कर पाते, तो उन्हें जल्द से जल्द कनाडा छोड़ना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी निर्वासन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

खालिस्तान समर्थक दावों पर पड़ेगा असर
भारतीय दृष्टिकोण में विशेषकर पंजाब के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा की इस नई नीति का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो भारत विरोधी गतिविधियों या खालिस्तान समर्थक मूवमेंट से जुड़े होने का दावा कर शरण मांगते रहे हैं। अब तक कनाडा ऐसे मामलों में 'खतरे' की आशंका के आधार पर आसानी से शरण दे देता था, लेकिन अब दावों की गहनता से जांच की जा रही है। भारत से भागकर कनाडा में शरण लेने वाले तत्वों के लिए अब वहां टिक पाना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

सीमा पार करने वालों के लिए नए नियम
सख्ती केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका से अनियमित तरीके से सीमा पार कर कनाडा पहुंचने वालों पर भी शिकंजा कसा गया है। नए नियमों के मुताबिक, जो लोग अमेरिका से कनाडा दाखिल हुए और उन्होंने 14 दिनों के भीतर शरण का दावा पेश नहीं किया, उन्हें अब सीधे तौर पर अपात्र घोषित किया जा सकता है। यह उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो अवैध रास्तों (डंकी रूट) के जरिए कनाडा में घुसपैठ करते रहे हैं।

बिना सुनवाई के फैसलों पर बढ़ा विवाद
कनाडा के इस रुख पर इमिग्रेशन वकीलों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। उनका तर्क है कि आवेदकों को अपनी बात रखने के लिए आमने-सामने की सुनवाई (Personal Hearing) का मौका नहीं मिल रहा है। सारा मामला कागजी कार्रवाई तक सीमित कर दिया गया है, जिससे किसी व्यक्ति के वास्तविक जीवन के जोखिमों को समझना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों को डर है कि इस हड़बड़ी में कई वास्तविक शरणार्थियों के साथ भी अन्याय हो सकता है, जिससे हजारों लोगों का भविष्य अब अधर में लटक गया है।

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