Sun, 18 Oct 2026
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मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितता पर जिला पंचायत सीधी का शिकंजा, 9 जिम्मेदारों को नोटिस अहिरनटोला पंचायत में फर्जी मूल्यांकन व भुगतान के आरोपों की जांच; करीब ₹15.46 लाख की राशि से जुड़े तीन मामलों में जवाब तलब

 

  भोपाल (सुरेन्द्र दुबे) मध्य प्रदेश के सीधी। जिला पंचायत सीधी के विहित प्राधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत ग्राम पंचायत अहिरनटोला, जनपद पंचायत रामपुर नैकिन से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू की है। जारी दस्तावेज में तत्कालीन सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, सहायक यंत्री, लेखाधिकारी एवं उपयंत्री सहित 9 लोगों के नाम उल्लेखित हैं।

दस्तावेज में दर्ज नामों के अनुसार कार्रवाई के दायरे में श्रीमती मनोरमा सिंह, तत्कालीन सरपंच; घनश्याम सिंह, तत्कालीन सरपंच; राममणि यादव, तत्कालीन सरपंच; यज्ञनारायण तिवारी, तत्कालीन सचिव; रघुवरन सिंह, तत्कालीन सचिव; राजेश कुमार मिश्रा, तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक; संतोष मिश्रा, सहायक लेखाधिकारी; डी.डी. श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक यंत्री तथा इमरात श्रीवास्तव, तत्कालीन उपयंत्री शामिल हैं।

नामों का उल्लेख उपलब्ध विभागीय दस्तावेज में दर्ज विवरण के आधार पर किया गया है।

तीन कार्यों में अनियमितता के आरोप

जिला पंचायत के आदेश में लगाए गए आरोपों के अनुसार ग्राम पंचायत अहिरनटोला में मनरेगा योजना के तहत 08 पशुशेड निर्माण के लिए स्वीकृत करीब ₹9.58 लाख की लागत के बावजूद बिना कार्य कराए फर्जी मूल्यांकन एवं सहायक यंत्री से सत्यापन कराकर ₹6,52,423 की राशि आहरित किए जाने का आरोप है।

दूसरे मामले में मनरेगा से स्वीकृत एक कूप निर्माण की करीब ₹3 लाख लागत के संबंध में बिना कार्य कराए फर्जी मूल्यांकन एवं सत्यापन के आधार पर ₹1,61,160 आहरित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

तीसरे मामले में मनरेगा से स्वीकृत दो सड़क निर्माण कार्यों की करीब ₹4.98 लाख लागत के संबंध में बिना कार्य कराए फर्जी मूल्यांकन व सत्यापन के आधार पर ₹4,66,930 की राशि आहरित किए जाने का आरोप दस्तावेज में दर्ज है।

इन तीनों मामलों में दर्ज रकम को जोड़ने पर ₹12,80,513 की राशि के आहरण का उल्लेख सामने आता है। हालांकि आदेश में कार्यों की स्वीकृत लागत और आरोपित आहरण की अलग-अलग रकम भी दर्ज है, इसलिए अंतिम वित्तीय देयता जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर खुला मामला

दस्तावेज में उल्लेख है कि संबंधित प्रकरण में उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक 30926/2025 पर 27 अप्रैल 2026 को आदेश पारित हुआ। न्यायालय ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनः अनुशासनिक प्राधिकारी यानी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सीधी के पास भेजा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए।

इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर प्रकरण का पुनः अवलोकन किया गया। विभागीय जांच में लगाए गए आरोपों को लेकर उपलब्ध अभिलेखों और जांच निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

‘एक व्यक्ति पर पूरी जिम्मेदारी डालना उचित नहीं’

विभागीय दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यों का मूल्यांकन उपयंत्री द्वारा, सत्यापन सहायक यंत्री द्वारा तथा भुगतान संबंधी प्रक्रिया जनपद स्तर पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के माध्यम से हुई थी। ऐसे में यदि फर्जी मूल्यांकन या राशि आहरण की पुष्टि होती है तो संबंधित सभी स्तरों की भूमिका और जिम्मेदारी निर्धारित करना जरूरी होगा, न कि किसी एक कर्मचारी पर पूरी जिम्मेदारी डालना।

जवाब के लिए समय, असंतोषजनक जवाब पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी

जिला पंचायत सीईओ द्वारा संबंधितों से लिखित जवाब और साक्ष्य अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया है। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है तथा नियमानुसार अनियमित व्यय की राशि की वसूली की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।

महत्वपूर्ण: दस्तावेज में लगाए गए आरोपों को अभी अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष, जांच का अंतिम निष्कर्ष और सक्षम प्राधिकारी का अंतिम आदेश सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट होगी।

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