Sat, 17 Oct 2026
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जालंधर कैंट में AAP के संगठन में सियासी भूचाल, 40 सरपंच और 7 पार्षद राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में उतरे

पंजाब के जालंधर कैंट विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी (AAP) के संगठन को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। हलके में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को लेकर हुई अहम बैठक के बाद 11 में से 10 ब्लॉक प्रधानों ने इस्तीफा दे दिया। दावा किया जा रहा है कि संगठन के पदाधिकारियों ने यह कदम राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में उठाया है। इस घटनाक्रम से हलके की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में जुटे पार्टी पदाधिकारी
मिली जानकारी के अनुसार, जालंधर कैंट हलके के सरपंचों, पार्षदों, ब्लॉक प्रधानों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों ने एक अहम बैठक की। इसमें राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया गया। बैठक में हलके के 40 सरपंच, 7 पार्षद, 2 जिला परिषद सदस्य और ब्लॉक समिति सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया है। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने संगठन से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

11 में से 10 ब्लॉक प्रधानों ने दिया इस्तीफा
इस घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि हलके के 11 ब्लॉक प्रधानों में से 10 ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा महिला विंग, ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ विंग, यूथ विंग और अन्य संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने भी इस्तीफे देकर अपना विरोध जताया।

इन इस्तीफों को राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में संगठनात्मक लामबंदी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

हाईकमान को दो दिन का अल्टीमेटम
बैठक के दौरान पार्षदों ने पार्टी हाईकमान से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। इसके लिए नेतृत्व को दो दिन का अल्टीमेटम दिए जाने की बात कही गई है। पदाधिकारियों के इस रुख से साफ है कि जालंधर कैंट में संगठन से जुड़ा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। यदि हाईकमान की ओर से तय समय के भीतर कोई फैसला नहीं लिया जाता, तो हलके में पार्टी की अंदरूनी स्थिति और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।

जालंधर कैंट में AAP की सियासत पर सबकी नजरें
राजविंदर थियाड़ा के समर्थन में पदाधिकारियों की एकजुटता और बड़े पैमाने पर इस्तीफों के दावे ने जालंधर कैंट की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब सबकी नजरें आम आदमी पार्टी की हाईकमान पर टिकी हैं कि वह इस घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है और क्या संगठनात्मक विवाद को सुलझाने के लिए कोई कदम उठाया जाता है।

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