Tue, 06 Oct 2026
G2M देता है आप कीं क़लम आप के हाथ । G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के। G2M देता है आप कीं क़लम आप के हाथ । G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के।
Post Details

DA विवाद में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, कहा- सुप्रीम कोर्ट जाना अधिकार, लेकिन ट्वीट कर फैसले को चुनौती नहीं

पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA/DR) से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील को लेकर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना सरकार का अधिकार है, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले को सार्वजनिक रूप से ट्वीट के जरिए चुनौती देने के तरीके को कोर्ट स्वीकार नहीं करेगी।

‘अब बहुत हो चुका, लुका-छिपी नहीं चलेगी’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त शब्दों में चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि अब बहुत हो चुका है और इस मामले में आगे लुका-छिपी नहीं चल सकती। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार अपने रवैये से खुद ऐसी स्थिति पैदा कर रही है, जिसमें उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की नौबत आ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट जाने के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को अपने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, अदालत ने इस बात पर आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट के फैसले को ट्वीट के माध्यम से चुनौती दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाना अलग बात है, लेकिन इस तरह सार्वजनिक तौर पर फैसले पर सवाल उठाने को कोर्ट उचित नहीं मानता।

मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई अब मंगलवार को होगी। हाईकोर्ट ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को भी अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई में सरकार की ओर से DA के बकाये और सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील से संबंधित स्थिति पर जवाब दिए जाने की उम्मीद है।

3 अगस्त के आदेश से जुड़ा है मामला
दरअसल, 3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को IAS, IPS और IFS अधिकारियों के बराबर लंबित DA और DR का भुगतान करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने उस समय यह भी कहा था कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाये का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक सरकार बड़े स्तर पर विज्ञापन जैसे खर्चों पर रोक लगाने पर विचार करे।

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 226039

Share this Post