पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जालंधर में पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने नशे के खिलाफ भगवंत मान सरकार को घेरा। ढिल्लों ने आरोप लगाया कि नशे के कारण पंजाब के कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं और सरकार नशे पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि नशे से प्रभावित परिवारों और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले आम लोगों की बात सामने लाई जाए।
मोहनजीत की बात सुनते तो शायद हालात अलग होते: ढिल्लों
केवल सिंह ढिल्लों ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले मोहनजीत का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को ऐसे लोगों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान मोहनजीत को अपने पास बुलाकर उसकी बात सुन लेते तो शायद आज परिस्थितियां अलग होतीं।
ढिल्लों ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके मुताबिक आम लोगों की आवाज को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाना चाहिए। मोहनजीत से जुड़े मामले को लेकर ढिल्लों पहले भी पुलिस कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं।
पंजाब में कब बंद होगा चिट्टा, सवाल पूछने पर प्रताड़ित किया
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने गुलजार सिंह के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक मजदूर ने पंजाब में चिट्टा कब बंद होगा, इसे लेकर सवाल उठाया था। ढिल्लों के मुताबिक इसके बाद उसे कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और उसने सल्फास खाकर जान दे दी। गुलजार सिंह की मौत को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग के अनुसार शिकायत में कहा गया था कि गुलजार सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सवाल उठाए थे और उनकी मौत से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था।
सिंदर कौर के छह बेटों की मौत का किया दावा
केवल ढिल्लों ने जगराओं की सिंदर कौर का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके एक-दो नहीं, बल्कि छह बेटों की नशे के कारण मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि नशे का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार इसकी चपेट में आ जाता है। ढिल्लों का कहना था कि नशे से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को सामने लाने और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने की जरूरत है।
पंजाब से बाहर जा रही इंडस्ट्री पर भी जताई चिंता
ढिल्लों ने पंजाब की औद्योगिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में कभी साइकिल इंडस्ट्री समेत कई कारोबार मजबूत स्थिति में थे, लेकिन अब उद्योग दूसरे राज्यों की ओर जा रहे हैं। रोजगार और औद्योगिक अवसरों की कमी का असर युवाओं पर भी पड़ता है। हालिया बयान में भी ढिल्लों ने नशे की समस्या को औद्योगिक और आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा था कि रोजगार के अवसरों की कमी युवाओं की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर सरकार पर सवाल
केवल सिंह ढिल्लों ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पंजाब की विकास संबंधी स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश लगातार पिछड़ रहा है और मौजूदा हालात को जनता के सामने रखने के लिए जनआंदोलन की जरूरत है। इस अभियान का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं और नशे से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को सामने लाना है, ताकि उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सके।





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