ਕੌਂਸਲਰ ਸੀਮਾ ਰਾਣੀ ਬੱਧਣ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਿਹੜੀ ਗਾਜੀ ਗੁੱਲਾ ਦੀ ਸੜਕ 20 ਸਾਲ ਨਹੀਂ ਉਸ ਨੂੰ ਮੇਅਰ ਵਨੀਤ ਧੀਰ ਨੇ ਬਣਾਇਆ ।
जालंधर के सिविल अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक महिला ने कृष्णा लैब के बाहर ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला को अचानक तेज लेबर पेन शुरू हुआ, जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत उसे संभालने की कोशिश की। इसी दौरान महिला ने अस्पताल परिसर में ही बच्चे को जन्म दे दिया। डिलीवरी के बाद महिला और नवजात दोनों को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, जहां उनकी हालत स्वस्थ बताई जा रही है।
तेज लेबर पेन के चलते अस्पताल के बाहर हुई डिलीवरी
मामले की जानकारी देते हुए मेडिकल सुपरिटेंडेंट नमिता घई ने बताया कि गोराया की रहने वाली सुशीला कृष्णा लैब के बाहर मौजूद थी। इसी दौरान डॉक्टर राउंड के लिए वहां से गुजर रहे थे। डॉक्टरों ने महिला को तेज लेबर पेन में देखा तो तुरंत स्टाफ को स्ट्रेचर लाने के लिए कहा। स्टाफ के स्ट्रेचर लेकर पहुंचने के दौरान ही महिला ने कृष्णा लैब के बाहर बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक मां और नवजात दोनों की हालत फिलहाल ठीक है। बताया जा रहा है कि सुशीला के पहले से चार बच्चे हैं।
स्ट्रेचर पर चादर न होने को लेकर उठे सवाल
घटना के दौरान एक और बात चर्चा में रही। महिला को जिस स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा था, उस पर चादर नहीं डाली गई थी। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन से सवाल भी किए गए। मेडिकल सुपरिटेंडेंट नमिता घई ने बताया कि महिला की हालत को देखते हुए जल्दबाजी में स्ट्रेचर मंगवाया गया और इलाज शुरू किया गया। इसी जल्दबाजी के कारण स्ट्रेचर पर चादर नहीं डाली जा सकी।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने वीडियो बनाने वालों से की अपील
नमिता घई ने घटना का वीडियो बनाने वालों से अपील की कि ऐसी स्थिति में वीडियो बनाने के बजाय तुरंत डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ को मामले की जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में डॉक्टरों को समय पर सूचना मिलने से मां और बच्चे की जान बचाने में मदद मिल सकती है।





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