झाड़ू लगाने से जालंधर साफ नहीं होगा, व्यवस्था बदलनी होगी”: भाजपा नेता विक्रांत मदान
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठजोड़ को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। दावे के मुताबिक दोनों दलों के बीच गठबंधन का फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है। इसमें सीट शेयरिंग से लेकर मुख्यमंत्री के चेहरे तक पर सहमति बनने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभाएगी और अकाली दल की तुलना में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को बनाया आधार
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, सीट शेयरिंग के फॉर्मूले का आधार 2024 लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन रखा गया है। लोकसभा चुनाव में भाजपा 23 विधानसभा सीटों पर पहले स्थान पर रही थी, जबकि 7 सीटों पर दूसरे और 28 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही थी। इसी प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने अपने हिस्से की सीटों पर दावा किया है। बताया जा रहा है कि पार्टी ने इसके अलावा दो और विधानसभा सीटों की मांग भी रखी है। सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा के बाद फॉर्मूला तैयार किया गया है।
चुनाव से पहले किसी को CM फेस नहीं बनाया जाएगा
गठबंधन में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भी स्थिति साफ होने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियां चुनाव परिणाम आने से पहले किसी नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करेंगी। यानी भाजपा और अकाली दल 2027 का विधानसभा चुनाव बिना किसी घोषित CM फेस के लड़ सकते हैं। चुनाव के नतीजे आने के बाद ही मुख्यमंत्री को लेकर फैसला किए जाने की बात कही जा रही है।
PM मोदी की गठबंधन पर नजर
भाजपा-अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सीधी नजर होने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच गठबंधन का औपचारिक ऐलान सितंबर में किया जा सकता है। सीट शेयरिंग को लेकर भाजपा की ओर से जिन विधानसभा सीटों पर दावा किया गया है, उनकी सूची भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि गठबंधन का आधिकारिक ऐलान नहीं होने के कारण फिलहाल इन सीटों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
2027 में बदल सकता है पंजाब का सियासी समीकरण
अगर भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन औपचारिक रूप से होता है तो इसका सीधा असर पंजाब की 2027 की चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है। दोनों दलों के एक साथ आने से आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के सामने नया चुनावी समीकरण खड़ा हो सकता है। फिलहाल सबकी नजर गठबंधन के आधिकारिक ऐलान और सीट शेयरिंग के अंतिम फॉर्मूले पर है।
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