Thu, 27 Aug 2026
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रील बनाने का चस्का पड़ा महंगा: पुलिस अनुशासन की धज्जियां उड़ाने वाले इंस्पेक्टर के खिलाफ यूथ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

जालंधर के इंस्पेक्टर राणा यादविंदर सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं और वे अक्सर पुलिस यूनिफॉर्म पहनकर ड्यूटी के दौरान रील्स शेयर करते हैं। हालांकि, अब सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने का यह शौक उनके लिए कानूनी और विभागीय गले की फांस बनता दिख रहा है। यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अंगद दत्ता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर जालंधर, पंजाब के डीजीपी गौरव यादव और मुख्यमंत्री कार्यालय को एक औपचारिक लिखित शिकायत सौंपी है।

सरकारी वर्दी में मनोरंजन और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप
अंगद दत्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर राणा यादविंदर ने आधिकारिक पुलिस वर्दी पहनकर गानों और मनोरंजन से भरपूर वीडियो सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए हैं। यह कदम पंजाब डीजीपी द्वारा जारी उन स्पष्ट आदेशों का सीधा उल्लंघन है, जिनमें पुलिसकर्मियों के वर्दी में कैजुअल वीडियो, डांस या मनोरंजन से जुड़ी रील्स बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, शिकायत में उस वीडियो क्लिप का भी जिक्र किया गया है जिसमें अधिकारी एक सफेद स्कॉर्पियो (गाड़ी नंबर PB-08-FQ-5070) से उतरते दिखते हैं, जिसके शीशों पर यातायात नियमों के विरुद्ध प्रतिबंधित डार्क/काली फिल्म चढ़ी हुई है।

खाकी की साख और जनता में गलत संदेश जाने की जताई चिंता
शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस महकमे के अधिकारियों से हमेशा उच्च स्तरीय अनुशासन और कानून का पालन करने की उम्मीद की जाती है ताकि वे आम नागरिकों के लिए मिसाल बन सकें। जब ड्यूटी पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारी ही सार्वजनिक रूप से विभागीय दिशा-निर्देशों और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करेंगे, तो इससे समाज में बेहद गलत संदेश जाता है। इस तरह के आचरण से कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के प्रति आम जनता का विश्वास कमजोर होता है।

मामले की निष्पक्ष जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि वायरल रील्स की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह खाकी के आचरण और डीजीपी के निर्देशों का उल्लंघन है या नहीं। साथ ही, स्कॉर्पियो गाड़ी पर अवैध रूप से लगाई गई काली फिल्म के मामले पर भी उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित इंस्पेक्टर के खिलाफ पुलिस सेवा नियमों के तहत सख्त प्रशासनिक व अनुशासनात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

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