जालंधर के एयरपोर्ट को मिली नई पहचान, अब कहलाएगा श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा
श्री वाल्मीकि रामायण का यह श्लोक है
लोक-नीति -न चातिप्रणयः कार्यः कर्त्तव्योप्रणयश्च ते ।
उभयं हि महान् दोसस्तस्मादन्तरदृग्भव ॥
मृत्यु-पूर्व बालि ने अपने पुत्र अंगद को यह अन्तिम उपदेश दिया था – तुम किसी से अधिक प्रेम या अधिक वैर न करना, क्योंकि दोनों ही अत्यन्त अनिष्टकारक होते हैं, सदा मध्यम मार्ग का ही अवलम्बन करना ।
Comments
No comments yet.