Mon, 03 Aug 2026
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पूर्व सचिव ने जिला कलेक्टर सीधी से लगाई न्याय की गुहार, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई लंबित होने का आरोप

 

भोपाल, (सुरेन्द्र दुबे) 

 मध्य प्रदेश के जिला सीधी मे जनपद पंचायत रामपुर नैकिन अंतर्गत ग्राम पंचायत अहिरान टोला के पूर्व सचिव यज्ञनारायण तिवारी ने कलेक्टर सीधी को आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अपने आवेदन की प्रतिलिपि उच्च न्यायालय जबलपुर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी को भी प्रेषित की है।

प्रार्थी यज्ञनारायण तिवारी ने बताया कि वे पूर्व में ग्राम पंचायत अहिरान टोला में सचिव पद पर पदस्थ थे, जहां से उनका स्थानांतरण 7 नवंबर 2014 को ग्राम पंचायत कुशमहर में कर दिया गया था। उनके स्थान पर सकसूदन बैगा की नियुक्ति की गई और दोनों ने अपना-अपना कार्यभार संभाल लिया।

इसी दौरान ग्राम पंचायत में रोजगार सहायक की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें मेरिट के आधार पर राममणि तिवारी प्रथम एवं किरण मिश्रा द्वितीय स्थान पर थे। आरोप है कि तत्कालीन सरपंच प्रतिनिधि फूलचंद मिश्रा द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बिना ग्राम पंचायत प्रस्ताव के अपने भतीजे राजेश मिश्रा की नियुक्ति करा दी गई। इस नियुक्ति का किरण मिश्रा द्वारा विरोध किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

तिवारी के अनुसार, इसके बाद ग्राम पंचायत में अनियमितताएं बढ़ने लगीं और ग्रामीणों ने शिकायतें भी कीं। उन्होंने बताया कि उनके स्थानांतरण के बावजूद ग्रामीणों ने उनकी पत्नी के मोबाइल से शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया।

20 सितंबर 2018 को ग्राम पंचायत की अनियमितताओं को लेकर जिला पंचायत में अपील की गई, लेकिन उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, प्रार्थी को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और बिना विभागीय जांच के उन्हें पद से पृथक कर दिया गया।

इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने कलेक्टर सीधी से शिकायत की, लेकिन प्रकरण खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार का दरवाजा खटखटाया, जहां से भी राहत नहीं मिलने पर उन्होंने उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण ली।

माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए उनके टर्मिनेशन आदेश को निरस्त कर दिया और 90 दिनों के भीतर विभागीय जांच कर नया आदेश जारी करने के निर्देश दिए। बावजूद इसके, पुनः प्रकरण को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद तिवारी ने दोबारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

प्रकरण क्रमांक WP 30926/2025 में दिनांक 27 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने पुनः 90 दिनों के भीतर विभागीय जांच पूर्ण कर उचित निर्णय लेने का आदेश दिया। लेकिन प्रार्थी का आरोप है कि 95 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई और उनसे अवैध रूप से धन की मांग की जा रही है।

तिवारी ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें षड्यंत्र के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से कर्जदार हो गए हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति भी गंभीर हो गई है। उन्होंने अपनी जान को खतरा भी बताया है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनकी पत्नी द्वारा दायर प्रकरण WA 665/2022 अभी तक लंबित है, जिसकी जांच के लिए कलेक्टर को अधिकृत किया गया था, लेकिन जिला पंचायत के स्तर पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

अंत में प्रार्थी ने कलेक्टर सीधी एवं संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि उच्च न्यायालय जबलपुर के प्रकरण क्रमांक WP 23984/2021 एवं WP 30926/2025 के निर्देशानुसार शीघ्र निर्णय सुनिश्चित किया जाए और उन्हें न्याय प्रदान किया जाए।

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