दीवारों के भी कान होते हैं....ये मुहावरे बचपन से जुड़े हुए हैं। वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में अब इसका प्रत्यक्ष रूप से पता चला की यह कहावत एक दम सही है।
#वास्तु शास्त्र में एक बात बताई गई है कि वास्तु देव हमेशा नष्ट हो जाते हैं। यानि जो भी हम कहते हैं, नमूना है वोसे तुरंत #तथास्तु बोलता है यानि "ऐसा ही हो"।
अब हम अपने घर में, ऑफिस में, माल में, दुकान में जहां भी कुछ भी देखते हैं वह सब उस स्थान की दुकान है, वहां का आकाश तत्व है फिर धारणा ही हमारे जीवन में है।
जैसे बहुत से लोगों में आदत होती है कि रेजगारी करना, साथियों को, अपने-अपने हिस्सों में रहना, जैसे मेरी तो किस्मत ही खराब है, मैं तो बीमार ही रहता हूं, हमारा तो कोई भी काम आसानी से नहीं बनता है, मेरी पत्नी बुरा है, मेरा बेटा सुनता नहीं है, बहू-सास अच्छी नहीं है.... आदि।
हम ये नहीं जानते कि ये सभी बातें जब निरंतर बोली जाती हैं तब ये हमारी कुमारी, हमारे स्थान का आकाश तत्व, ब्रह्मांड इसे ग्रहण कर लेती हैं और फिर वास्तु देव कहते हैं "तथास्तु" अर्थात ऐसा ही हो और धारणा ही होती है ..
वास्तुशास्त्र से यदि हमें लाभ है तो सबसे पहले हमें अपने शब्दों पर ध्यान देना होगा। हम क्या बोल रहे हैं, बहुत सोच समझकर बात करेंगे, सबसे बड़ी बात हम क्या चाहते हैं वही बात करेंगे।
अब अगर हम यही कहते हैं कि बहू बहुत देर हो गई है तो यकीन मानो एक दिन बहुत देर से ही व्यवहार करना।
क्योंकि ब्रह्मांड जादू, वह पूर्ण इच्छा जो हम बोलेंगे।
क्योंकि लगातार एक ही बात है कि बहुत दिन तक बचे रहने से वो मंत्र बन जाता है और फिर एक दिन तक मंत्र सिद्ध हो जाता है।
इसलिए जीवन को, घर को, परिवार को, व्यापार को, संबंधों को, पड़ोसी, एनबीए, शरीर के बारे में बुरा न बोलकर उपहार आशीर्वाद मिले।शिकायतें खाली कर दे फिर आप अपने जीवन में चमत्कार देखें।
तिवारी #वास्तु
9780011033
आपकी समस्या का अंत
प्रवीण तिवारी के संग



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