विश्लेषण: 'आम आदमी' की सरकार का 'VVIP' आयोजन, सड़कों पर रुलती रही आस्था
*दो चीजों को कभी व्यर्थ*
*नहीं जाने देना चाहिए*.....
*अन्न के कण को*
*"और"*
*आनंद के क्षण को*
*हमेशा मुस्कुराते रहिए*....
*कभी अपने लिये कभी अपनों के लिये*
*जिंदगी पिता की देन है*
*और पिता का साथ रहना*
*किस्मत की देन है*
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