विश्लेषण: 'आम आदमी' की सरकार का 'VVIP' आयोजन, सड़कों पर रुलती रही आस्था
*फ़र्क़ चेहरे की हँसी पर*
*सिर्फ इतना सा पाते हैं*
*पहले आती थी..*
*अब लाते हैं*
*तुम्हारा सबसे बड़ा शत्रु*
*तुम्हारा अनियंत्रित मन है*
*पैसा सिर्फ बोलता नहीं*
*बोलती भी बंद कर देता है*
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