—— गुस्ताख़ी ——
जज ने कैदी की ओर मुंह घुमाया,
उसे कुछ भाषण पिलाया
फिर पूछा-
सभी कुछ केवल तुम ही जानते हो,
क्या तुम अपना अपराध मानते हों ?'
कैदी बोला-
'शुभ-शुभ बोलिए हजूर
मेरे भाग्य क्या इतने सो रहे हैं,
कुछ देर इंतजार तो करें
अभी तो मेरे वकील द्वारा
मुझे बचाने के प्रयास हो रहे हैं
— गुस्ताख़



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