Thursday, 29 Jan 2026

जालंधर में China डोर की चपेट में आया युवक, कट गया कान और उंगली

जालंधर में चाइना डोर एक बार फिर मासूम लोगों के लिए काल साबित हो रही है। प्रशासन और पुलिस द्वारा हर साल इस जानलेवा डोर की बिक्री पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। सीजन की शुरुआत होते ही शहर में खुलेआम बिक रही चाइना डोर ने इस साल भी अपना खूनी खेल शुरू कर दिया है। ताजा मामले में रैनक बाजार में काम करने वाले एक युवक का कान इस डोर की चपेट में आने से बुरी तरह कट गया, जिससे पुलिसिया मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बुजुर्ग को दुकान ले जाते समय हुआ दर्दनाक हादसा
हादसे का शिकार हुए युवक की पहचान कृष्णा के रूप में हुई है, जो रैनक बाजार स्थित एक कपड़े की दुकान पर कार्यरत है। घटना के वक्त कृष्णा अपने दुकान मालिक के बुजुर्ग पिता को सुरक्षित तरीके से दुकान पर लेकर जा रहा था। जैसे ही वह आदर्श नगर गुरुद्वारा साहिब के पास पहुँचा, हवा में लहराती हुई तेजधार चाइना डोर अचानक उसके चेहरे और सिर पर आकर लिपटी। डोर इतनी घातक थी कि पलक झपकते ही युवक का कान कटकर अलग हो गया। अत्यधिक खून बहने और अपने कान की हालत देखकर युवक मौके पर ही बेहोश हो गया, जिसके बाद राहगीरों ने उसे सिविल अस्पताल पहुँचाया।

प्रशासन और पुलिस की नाकामी पर उठे सवाल
सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान होश में आने के बाद घायल कृष्णा ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश जताया। उसने सीधे तौर पर इस हादसे के लिए अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। युवक का कहना है कि शहर के हर कोने में चाइना डोर बिना किसी डर के बिक रही है। बच्चे और युवा बेखौफ होकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन पुलिस इसे रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हैरानी की बात यह है कि जब सरकार ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है, तो इतने वर्षों बाद भी पुलिस इसके नेटवर्क को खत्म क्यों नहीं कर पा रही है।  

जमीनी स्तर पर नहीं दिख रही कार्रवाई
जालंधर में हर साल चाइना डोर के कारण कई लोग अपनी जान गंवाते हैं या स्थाई रूप से अपंग हो जाते हैं। पुलिस द्वारा हर साल कागजों में कार्रवाई के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन रैनक बाजार जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों और पॉश इलाकों में इस डोर का कहर जारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक पुलिस बड़े सप्लायर्स पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक बेकसूर राहगीर इसी तरह इस खूनी डोर का शिकार बनते रहेंगे।


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