NDA ने एक बार फिर से नीतीश कुमार जी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। हालांकि भाजपा ने चुनावों के दौरान नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया था। भाजपा को लगा था कि हम अकेले 125 के करीब सीटें ले जाएंगे और फिर "न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी"। लेकिन बिहार के चुनाव नतीजे त्रिकोणीय आए और भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया जिसके चलते अंतत: NDA को अपना नेता नीतीश कुमार जी को ही चुनना पड़ा। वैसे अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल भी जाता,125 सीटें ले भी जाती तो भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनते। बिहार में वर्तमान समय में नीतीश कुमार के कद का कोई और नेता नहीं है। बिहार के अंदर अगर RJD भी ज्यादा सीट ले जाती तो भी मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा की मजबूरी है क्योंकि अगर नीतीश कुमार के साथ मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा छेड़छाड़ करती तो नीतीश 15 दिन के अंदर सीधे प्रधानमंत्री बन जाते। नीतीश कुमार कल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह गठबंधन कितना समय चलता है इसकी कोई गारंटी नहीं है खैर नीतीश जी को 10वीं बार बिहार का मुख्यमंत्री बनने की हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई। उम्मीद है अब कोई बिहारी पंजाब की सड़कों में रिक्शा चलाता नहीं मिलेगा और ना ही हिमाचल में मजदूरी करता मिलेगा। सब बिहारियों को नीतीश जी मोदी जी के स्वर्णिम युग में बिहार में रोजगार के अवसर देंगे। जय हिंद।
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