Friday, 30 Jan 2026

काव्य संकलन "श्रुता"

*हिन्दी*

 

 

मैं हिन्दी की बेटी हूँ,

संस्कृति मेरी पहचान है,  

वेदों की गहराई में बसे, 

गीता-पुराण का मान है।  

 

मिट्टी से जुड़ी हूँ,

वतन की खुशबू से महकती हूं ,  

भाषाओं में विविधता है , 

पर हिंदी मेरा मान है,  

 

सरलता और मिठास से 

जीवन का अहसास है।  

गंगा, यमुना, सरस्वती का अटूट सम्मान है,  

वसुधैव कुटुंबकम् में हिन्दी का अभिमान है।

 

 

 

*कंचन "श्रुता"* ????


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