Sun, 01 Nov 2026
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निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा : रामायण

चाहे कोई वेद पुराण व्र सिद्धान्त के तत्व का अभ्यास करे, लेकिन जो ह्रदय साफ़ न हो तो ये सब बेकार है !


रामायण में लिखा गया कि 
निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा
इस समय कपट छल छिद्र और पाखंड का ही बढ़ावा है भगवान सद्बुद्धि दे जिससे सत्य सनातन धर्म की रक्षा हो सके।


यदि वहसि त्रिदण्डं नग्रमुंडं जटां वा
यदि वससि गुहायां पर्वताग्रे शिलायाम् ।
यदि पठसि पुराणं वेदसिध्धान्ततत्वम्
यदि ह्रदयमशुध्दं सर्वमेतन्न किज्चित् ॥

आदमी त्रिदंड धारण करे, सिर का मुंडन करे, जटा बढाये, गुफा में रहे या पर्वत की चोटी पर, और वेद पुराण व्र सिद्धान्त के तत्व का अभ्यास करे, लेकिन जो ह्रदय साफ़ न हो तो ये सब बेकार है !

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