विश्लेषण: 'आम आदमी' की सरकार का 'VVIP' आयोजन, सड़कों पर रुलती रही आस्था
कैसे टुकड़ों में उसे कर लूँ क़ुबूल
जो मिरा सारे का सारा था कभी
शारिक़ कैफ़ी
मैं तिनकों का दामन पकड़ता नहीं हूँ
मोहब्बत में डूबा तो कैसा सहारा
नुशूर वाहिदी
दूर तक ये रास्ते ख़ामोश हैं
दूर तक हम ख़ुद को सुनते जाएँगे
तनवीर अंजुम
तमाम उम्र ख़ताओं से ही सबक सीखा
मैं सीधी राह पे आया..ग़लत तरीक़े से...
ज़ुबैर क़ैसर
मुझ में है यही ऐब कि औरों की तरह मैं
चेहरे पे कभी दूसरा चेहरा नहीं रखता
फ़राग रोहवी
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