Tue, 04 Aug 2026
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भगवान श्री कृष्ण जी हमे सद मार्ग पर चलने की शक्ति दे । : योगिराज रमेश जी

आनंदकंद नंदनंदन सच्चिदानंद लीला पुरुषोत्तम श्री कृष्ण चंद्र भगवान हमें सद् मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए आज यही प्रार्थना है।


व्याघ्रीव तिष्ठति जरा परितर्जयन्ती
रोगाश्च शत्रव इव परिहरन्ति देहम् ।
आयुः परिस्रवति भिन्नघटादिवाम्भो
लोकस्तथाप्यहितमाचरतीति चित्रम् ।।

 वृद्धावस्था बाघिन की तरह गुर्राती-सी सामने खड़ी है, शत्रुओं की भांति रोग शरीर पर प्रहार किये जा रहे हैं, दरार वाले फूटे घड़े से चू रहे पानी की तरह आयु-क्षरण हो रहा है, फिर भी यह संसार (जनसमूह) अहितकर कार्यों में संलग्न रहता है इस तथ्य का ज्ञान मेरे लिए वास्तव में विचित्र है ।

भगवान श्री कृष्ण हमारी रक्षा करेंll
तमिममहमजं शरीरभाजां हृदिहृदि धिष्टितमात्मकल्पितानाम् । प्रतिदृशमिव नैकधाऽर्कमेकं समधिगतोऽस्मि विधूतभेदमोहः ॥

जैसे एक एक ही सूर्य अनेक आँखों से अनेक रूपों में दीखते हैं, वैसे ही अजन्मा भगवान श्रीकृष्ण अपने ही द्वारा रहित अनेक शरीरधारियों के हृदय में अनेक रूप-से जान पड़ते हैं; वास्तव में तो वे एक और सबके हृदय में विराजमान हैं ही। उन्हीं इन भगवान श्रीकृष्ण को मैं भेद-भ्रम से रहित होकर प्राप्त हो गया हूँ ।

             

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।

 भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ में जन्म लिया, गोपी-ग्वालों के साथ बड़े हुए, पूतना का संहार किया, गोवर्धन पर्वत को धारण किया, कंस का वध किया, कुंती पुत्र यानी पांडवों की रक्षा की, कौरवों का नाश किया इस प्रकार कृष्ण ने संसार में अपनी लीलाएं रची।

 

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