Fri, 31 Jul 2026
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बेबस हूं बेवफा नही

*बेबस हूं बेवफा नही*

 

 

 

तुमसे दूर 

मैं जा तो रही हूं ...

 

बदलती राहों में 

बिखरे हैं ।

इरादों के टुकड़े ,

मजबूरी की 

जंजीरों में बसे हैं , 

तेरे मेरे ख़्वाब ।

 

कभी तो 

समझोगे 

तुम मेरा 

हाल-ए-दिल ,

मर्यादा से बंधी हूं ।

 

मैं बेबस हूं 

बेवफ़ा नही

बेबस हूं 

बेवफ़ा नही ।

 

 

 

डॉ. कंचन "श्रुता"

 

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