पंजाब की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने का ऐलान कर दिया। उन्होंने पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए सभी अकाली दलों और पंथक संगठनों को एक मंच पर आने की अपील की। चंदूमाजरा के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक हालात में पंजाब समर्थक ताकतों का एकजुट होना बेहद जरूरी हो गया है।
पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए साझा संघर्ष की अपील
प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल हमेशा से पंथ और पंजाब की नुमाइंदगी करने वाली राजनीतिक जमात रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पंजाब के अधिकारों और हितों के लिए संघर्ष किया है। हालांकि, मौजूदा हालात को लेकर उन्होंने निराशा जाहिर की। उनका कहना था कि प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए जिस तरह की प्रभावी राजनीतिक भूमिका निभाई जानी चाहिए, उसकी कमी महसूस हो रही है। उन्होंने सरकार के जनविरोधी और पंजाब विरोधी फैसलों के खिलाफ मजबूत राजनीतिक आंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अकाली दल के अलग-अलग धड़ों में बंटने से विरोधियों को फायदा
प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि अकाली दल के अलग-अलग गुटों में बंटे होने का फायदा उन ताकतों को मिल रहा है, जो पंजाब और पंथ के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बिखराव के कारण पंजाब के मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाने में मुश्किलें आ रही हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले एकजुटता पर दिया जोर
आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि पंजाब के हितों की रक्षा के लिए सभी पंजाब समर्थक राजनीतिक और पंथक संगठनों को एक मंच पर आना चाहिए। उन्होंने साझा संघर्ष को समय की जरूरत बताते हुए सभी अकाली नेताओं और संगठनों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया।


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