Fri, 30 Oct 2026
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फूलों से सजी गाड़ी में निकली अंतिम यात्रा, भगत चुन्नी लाल को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई

 कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के पिता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री भगत चुन्नी लाल का आज सुबह 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजी गाड़ी में बस्ती शेख श्मशान घाट ले जाया गया, जहां परिवार और करीबियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

राजकीय सम्मान के साथ पुलिस ने दी अंतिम सलामी
भगत चुन्नी लाल के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में नेता और सामाजिक लोग पहुंचे। इस दौरान जालंधर के मेयर विनीत धीर, पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया, पूर्व विधायक शीतल अंगुराल, नीतिन कोहली सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। वहीं पंजाब पुलिस की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान के तहत गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी गई।

1985 में शुरू किया था राजनीतिक सफर
भगत चुन्नी लाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1985 में की थी। उन्होंने जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

1997 में उन्होंने जालंधर दक्षिण सीट से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और पंजाब विधानसभा पहुंचे। 2007 में वह इसी सीट से दूसरी बार विधायक चुने गए। परिसीमन के बाद जालंधर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र का नाम जालंधर पश्चिम हो गया। वर्ष 2012 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर जालंधर पश्चिम से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

बादल सरकार में संभाले कई अहम मंत्रालय
भगत चुन्नी लाल अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2011 में सतपाल गोसाईं के इस्तीफे के बाद उन्हें पंजाब विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया था। इसके बाद 2012 से 2017 तक प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

इस दौरान उनके पास स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, श्रम तथा वन एवं वन्यजीव जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे। 2012 से 2017 तक वह पंजाब विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता भी रहे।

2017 में राजनीति से लिया संन्यास
जालंधर पश्चिम की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले भगत चुन्नी लाल ने 2017 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। उनका जन्म 1 दिसंबर 1932 को सियालकोट में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार जालंधर आकर बस गया था।

राजनीति के अलावा उनका स्पोर्ट्स गुड्स के निर्यात का कारोबार भी था। उनके परिवार में चार बेटे और चार बेटियां हैं। उनके निधन के बाद जालंधर समेत पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।

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