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महानता का सूत्र और रहस्य बडे सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं ॥
जलधि अगाध मौलि बह फेन। संतत धरनि धरत सिर रेनू ॥
बडे लोग अपने से छोटों पर प्रेम करते हैं। पहाड़ अपने सिर पर हमेशा तृण (घास) धारण करता है।अथाह सागर के मस्तक पर भी फेन जमा रहता है एवं धरती के मस्तक पर हमेशा धूल के कण रहतें हैं । इस दोहे के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास जी महान बनने का रहस्य उद्घाटित करते हुए कह ईशारा कर रहें हैं कि संसार में बड़ा वही हो सकता है जिसमें अपने से छोटे तथा सामान्य व्यक्तियों को भी सम्मान देने की शक्ति और स्वयं से अधिक महत्वपूर्ण मानने का धैर्य हो । एक वाक्य में महानता का सूत्र अपने से कमजोर और नीचे वाले व्यक्तियों को भी सम्मान देना ही है ।



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