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अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाले बिल के विरोध को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार दिया। सिरसा ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने इस महत्वपूर्ण बिल का विरोध कर देश की महिलाओं के अधिकारों को छीनने का प्रयास किया है।
विपक्ष के रुख पर खड़े किए गंभीर सवाल
मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास इस मुद्दे पर हमेशा बाधा डालने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल लागू होने से देश की नारी शक्ति का सम्मान और भागीदारी बढ़ती, लेकिन विपक्ष के नकारात्मक रवैये ने उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। सिरसा ने विशेष रूप से पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि जिस राज्य में महिलाओं का इतना ऊंचा सम्मान किया जाता है, वहां के सांसदों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।
हदबंदी और पंजाब के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा
इस दौरान सिरसा ने हदबंदी (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को भी दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि हदबंदी होने से पंजाब को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलता। इससे राज्य की लोकसभा सीटें 13 से बढ़कर 20 हो सकती थीं और विधानसभा सीटों की संख्या भी 117 से बढ़कर लगभग 170 तक पहुंच जाती। विपक्ष इस सच को छिपाकर जनता के बीच झूठ परोस रहा है।
भाजपा की प्रतिबद्धता का दोहराव
सिरसा ने अपने संबोधन के अंत में भारतीय जनता पार्टी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि पार्टी महिला आरक्षण बिल को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेगी और किसी भी राजनीतिक बाधा को महिला सशक्तिकरण के रास्ते में नहीं आने दिया जाएगा।


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