आज की गुस्ताख़ी
11.04.2026
इक दिन था जयकिशन को अवकाश,
घर में ही घूम रहा था हताश,
उसने पत्नी को आवाज लगाई-
"सुनो मेरे मुन्ने की झाई
मेरे सोने के लिए जुगाड़ भिडाओ,
अंदर से कुर्सी लेकर आओ"
पत्नी बोली-
आप कुर्सी पर ही सोने की
क्यों हेठ कर रहे हैं
पलंग पर सोने से
क्यों परहेज कर रहे हैं ?'
जयकिशन बोला-
'अरे तू हर बात पर
क्यों करती बगावत है
मुझे दफ्तर की तरह ही
सोने की आदत है।' - गुस्ताख़


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