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फिरोजपुर के सिटी थाने में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक आरोपी को छोड़ने के मुद्दे पर एएसआई रमन और एसएचओ गुरमीत सिंह के बीच तीखी बहस हो गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले ये दोनों अधिकारी एक-दूसरे के सामने आ खड़े हुए और उनके बीच हुई इस तकरार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि एसएचओ ने अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए एक आरोपी को जबरन हिरासत से छुड़ा लिया, जिससे एएसआई रमन नाराज हो गए।
तफ्तीश में दखल और तीखी नोकझोंक
वायरल हो रहे वीडियो में एएसआई रमन को अपने वरिष्ठ अधिकारी यानी एसएचओ से सवाल करते हुए देखा जा सकता है। रमन ने गुस्से में पूछा कि एसएचओ उनकी तफ्तीश में बार-बार दखल क्यों दे रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले उन्होंने खुद एसएचओ से लड़की वाली जांच फाइल (मिसल) लेने का आग्रह किया था, लेकिन उस समय उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया था। जब एसएचओ गुरमीत सिंह ने कहा कि उन्हें यह बर्ताव अच्छा नहीं लग रहा है, तो जवाब में एएसआई ने भी कड़े शब्दों में कहा कि आप एसएचओ हैं तो आपको एसएचओ जैसा ही काम करना चाहिए।
हाथापाई और नेम प्लेट टूटने का आरोप
मामला सिर्फ जुबानी बहस तक ही सीमित नहीं रहा। एएसआई रमन का दावा है कि एसएचओ गुरमीत सिंह ने सभी कर्मचारियों और लोगों के सामने उन्हें अपमानित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस खींचतान के दौरान एसएचओ ने उनकी वर्दी पर लगी नेम प्लेट भी तोड़ दी। एएसआई के अनुसार, जांच प्रक्रिया में इस तरह का हस्तक्षेप और दुर्व्यवहार कर्तव्य के प्रति निष्ठा को प्रभावित करता है।
एसएचओ की सफाई और सीसीटीवी की चुनौती
वहीं दूसरी ओर, एसएचओ गुरमीत सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने एएसआई के दावों को खारिज करते हुए कहा कि थाने के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों में सारी सच्चाई कैद है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच की जाए। एसएचओ ने विश्वास जताया कि वे निर्दोष हैं और उन्होंने कहा कि यदि जांच में उनकी कोई गलती पाई जाती है, तो वे किसी भी विभागीय कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं।


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