Tue, 15 Sep 2026
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विश्लेषण : AAP में 'राघव' लीला: बगावत के सुर या किनारे लगाने की सोची-समझी रणनीति?

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर का राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। कभी पार्टी के सबसे भरोसेमंद और 'पोस्टर बॉय' माने जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आज अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। 2 अप्रैल को पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी सौंपना महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि एक गहरे आंतरिक संघर्ष का संकेत है। पार्टी ने न केवल उन्हें पद से हटाया, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उनके बोलने के समय पर भी अंकुश लगाने की मांग की। यह कदम स्पष्ट करता है कि पार्टी और राघव के बीच के रिश्ते अब उस मोड़ पर आ गए हैं, जहाँ से वापसी की राहें धुंधली नजर आती हैं।

साजिश के आरोप और राघव की सफाई

राघव चड्ढा ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। 4 अप्रैल को जारी अपने दूसरे वीडियो में उन्होंने इसे एक 'को-ऑर्डिनेटेड अटैक' करार दिया। राघव का कहना है कि उनके खिलाफ एक ही भाषा और एक ही तरह के आरोपों के साथ स्क्रिप्टेड कैंपेन चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में उनका आचरण शोर मचाने या माइक तोड़ने का नहीं, बल्कि शालीनता से जनता के मुद्दे उठाने का रहा है। राघव का यह तर्क कि "एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो लोग उसे सच मान लेते हैं", सीधे तौर पर उनकी अपनी ही पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं की ओर इशारा करता है।

क्या लोकप्रियता ही बन गई दुश्मन?

इस पूरे विवाद में कवि और पूर्व आप नेता कुमार विश्वास का वह बयान फिर से चर्चा में है, जो उन्होंने अगस्त 2024 में एक पॉडकास्ट के दौरान दिया था। विश्वास ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि राघव चड्ढा पार्टी का 'अगला शिकार' होंगे। उन्होंने तर्क दिया था कि राघव की बढ़ती लोकप्रियता, उनकी 'आभा' और ग्लैमरस लाइफस्टाइल (परिणीति चोपड़ा से शादी और रील्स का शौक) पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बर्दाश्त नहीं हो रही है। राजनीति में अक्सर देखा गया है कि जब किसी व्यक्ति का कद पार्टी की विचारधारा या सर्वोच्च नेता के साये से बाहर निकलने लगता है, तो उसे अनुशासन के नाम पर हाशिए पर धकेल दिया जाता है।

अनुपस्थिति और वफादारी की परीक्षा

विवाद की जड़ें केवल हालिया पदच्युति में नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों में छिपी हैं। राघव चड्ढा के वीडियो के जवाब में अनुराग ढांडा, आतिशी और मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसे कद्दावर नेताओं ने मोर्चा खोलते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का सबसे बड़ा आरोप यह है कि जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब राघव आंखों के ऑपरेशन की बात कहकर यूके (UK) में थे। संकट के समय पार्टी का साथ छोड़कर विदेश में बैठना अब उनकी वफादारी पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है, जिसे पार्टी के कार्यकर्ता आसानी से भूलने को तैयार नहीं हैं।

मुद्दों की लड़ाई या रसूख का टकराव?

पार्टी के भीतर से उठ रही आवाजें अब राघव की संसदीय सक्रियता पर भी तंज कस रही हैं। नेताओं का कहना है कि राघव राष्ट्रीय महत्व के गंभीर मुद्दों के बजाय 'समोसे के रेट' जैसे छोटे विषय उठाते हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट के दौरान भी पार्टी के आदेशों की अनदेखी की। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राघव अब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने से कतरा रहे हैं, जिसे उनकी 'डर' या 'नरमी' के रूप में देखा जा रहा है।

खामोश दरिया' की चेतावनी

राघव चड्ढा ने 3 अप्रैल के वीडियो में अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि संसद में जनता के मुद्दे उठाना अपराध नहीं है। उन्होंने अपनी बेबसी और गुस्से को जाहिर करते हुए कहा, "मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।" उनके इस 'सैलाब' वाले बयान ने पार्टी हाईकमान को सीधी चुनौती दी है। राघव का यह दर्द कि उनसे संसद में बोलने का अधिकार छीना जा रहा है, यह दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी अब उन्हें एक सांसद के रूप में भी स्वतंत्र रूप से काम करने देने के मूड में नहीं है।

भविष्य के गर्भ में AAP का 'आंतरिक युद्ध'

अंततः, यह लड़ाई अब केवल एक पद की नहीं बल्कि 'अस्तित्व' और 'साख' की बन गई है। क्या राघव चड्ढा वाकई एक 'सैलाब' बनकर पार्टी के भीतर अपनी जगह दोबारा बनाएंगे, या फिर वे भी योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास की तरह पार्टी के इतिहास का एक अध्याय बनकर रह जाएंगे? फिलहाल, अशोक मित्तल को उपनेता बनाकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि वह वफादारी और अनुशासन को ग्लैमर से ऊपर रखती है। राघव का 2028 तक का कार्यकाल अभी लंबा है, लेकिन जिस तरह की दूरियां पैदा हो चुकी हैं, उसे पाटना नामुमकिन सा नजर आता है।

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